फिच ने नहीं बढ़ाया भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान, घटाकर 6.7 फीसद किया

। प्रमुख ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच ने भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान घटा दिया है। एजेंसी ने चालू वित्त वर्ष के लिए इस अनुमान को 6.9 से घटाकर 6.7 फीसद कर दिया है। रेटिंग एजेंसी का कहना है कि हाल की कुछ तिमाहियों में अर्थव्यवस्था में सुधार की दर उम्मीद से कमतर रही है।

अपने ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक (जीईओ) में फिच ने अगले वित्त वर्ष के लिए भी देश की विकास दर के अनुमान को 7.4 से 7.3 फीसद कर दिया है। हालांकि सरकार की ओर से लगातार उठाए जा रहे आर्थिक सुधार के कदमों के चलते अगले दो वर्षो विकास दर में तेजी का अनुमान जताया गया है। फिच ने जीईओ में कहा, ‘जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान भारत की आर्थिक विकास दर 6.3 फीसद रही। यह इससे पिछली तिमाही में तीन साल के निचले स्तर 5.7 फीसद तक गिर गई थी। इसके बावजूद विकास दर में सुधार उम्मीद से कम है। इसीलिए वृद्धि दर के अनुमान को कम किया गया है। नोटबंदी जैसे अप्रत्याशित कदम और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़ी परेशानियों के चलते हाल की तिमाहियों में विकास दर लगातार निराशाजनक रही है।’

लगातार पांच तिमाहियों की गिरावट के बाद चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में विकास दर में तेजी आई है। 30 सितंबर को समाप्त इस तिमाही में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों में तेज सुधार से अर्थव्यवस्था की रफ्तार में बढ़ोतरी हुई। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि आर्थिक सुधार की दिशा में सरकार के कदमों से विकास परिदृश्य में सुधार होगा। उद्यमियों का भरोसा बढ़ेगा। अगले दो साल में बैंकों में 2.1 लाख करोड़ की पूंजी डालने संबंधी सरकारी योजना से बैंकों की कर्ज देने की क्षमता बढ़ेगी। इसके अलावा 6.9 लाख करोड़ रुपये की सड़क निर्माण परियोजनाओं से निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। महंगाई भी नियंत्रण में बनी हुई है।

बेहतर रहेगी विश्व अर्थव्यवस्था की रफ्तार
बीती तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर बढ़ने के बावजूद फिच ने भारत की विकास दर के लिए अपना अनुमान कम कर दिया है। एजेंसी का कहना है कि अर्थव्यवस्था में सुधार उम्मीद के अनुरूप नहीं है।